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स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
कोलकाता। कोलकाता के प्रतिष्ठित जी डी गोयनका पब्लिक स्कूल से सामने आई एक गंभीर घटना ने न सिर्फ अभिभावकों, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। सातवीं कक्षा में पढऩे वाले 12 वर्षीय छात्र आतिश गोयनका के साथ कथित रूप से हुई अमानवीय हिंसा का मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है। घटना के बाद से छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों ने उसे 15 दिनों की बेड रेस्ट की सलाह दी है। परिवार की ओर से नागेरबाजार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह कोई अचानक हुई झड़प नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही बुलिंग और स्कूल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। परिवार के मुताबिक, आतिश अपने सहपाठी तनवीर सोनी की लगातार बूलिंग से परेशान था। 28 नवंबर को उसने इस बात की शिकायत अपने क्लास टीचर से की थी। आरोप है कि इसी शिकायत से नाराज़ होकर तनवीर के तीन दोस्तों ने स्कूल छुट्टी के बाद बस पार्किंग एरिया में आतिश पर हमला कर दिया। शिकायत में बताया गया है कि छात्र प्रत्युष तिवारी ने आतिश के सीने, हाथ और पैरों पर जूते से लगातार लातें मारीं, जबकि अन्य दो छात्र सोहन सिंह और वेदांत जायसवाल ने उसके दोनों हाथ पकड़कर उसे बचाव का कोई मौका नहीं दिया। गंभीर रूप से घायल और मानसिक रूप से टूटे आतिश किसी तरह घर पहुंचा, लेकिन उसने डर और दबाव के चलते परिवार को घटना के बारे में कुछ नहीं बताया। हालांकि 3 दिसंबर से उसकी तबीयत तेजी से बिगडऩे लगी। 4 दिसंबर की सुबह उसकी चलने की क्षमता तक खत्म हो गई और तेज बुखार आ गया। बेटे की हालत देखकर परिजन घबरा गए और तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया।
परिवार का आरोप है कि 8 दिसंबर को आतिश के पिता स्कूल पहुंचे, लेकिन प्रिंसिपल ने व्यस्तता का हवाला देकर मिलने से इनकार कर दिया और अगले दिन आने को कहा। कुछ दिन बाद जब माता-पिता दोबारा स्कूल पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, तो स्कूल प्रशासन ने कथित तौर पर बहाने बनाकर फुटेज दिखाने से इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान स्कूल परिसर में तनाव के बीच आतिश के पिता को लॉबी में हार्ट अटैक आ गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहां उनकी एंजियोग्राफी कराई गई। फिलहाल वह भी घर पर ही इलाजरत हैं। घटना के बाद नागेरबाजार थाने में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट, स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा, एंटी-बुलिंग सिस्टम, और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।
अभिभावकों का सवाल है कि जब एक नामी स्कूल में शिकायत के बावजूद बच्चा सुरक्षित नहीं है, तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यह मामला अब केवल एक छात्र पर हुई हिंसा का नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की जवाबदेही और बच्चों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।